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उगाच

उगाच मोठा झालो मी !!!! उगाच, उगाच मोठा झालो मी आईच्या त्या प्रेमळ घासाला मुकलो मी ताई दादाचा हात धरून फिरणेच विसरलो मी उगाच, उगाच मोठा झालो ...

उगाच मोठा झालो मी !!!!

उगाच, उगाच मोठा झालो मी
आईच्या त्या प्रेमळ घासाला मुकलो मी
ताई दादाचा हात धरून फिरणेच विसरलो मी
उगाच, उगाच मोठा झालो मी !!!

ती बाईंची छडी, घाबरून घातलेली हाताची घडी
केसातून फिरलेला बाईंचा तो हात
कधीतरी, कोणाचीतरी पाठीवर पडलेली शाबासकीची थाप
सारच केवळ आठवतोय मी
उगाच, उगाच मोठा झालो मी !!!

आई बाबांची गोड गोड पापी
वाढदिवसाला जमणारे काका आणि काकी
आजारी पडता जमणारी गर्दी माणसांची
वर्गात होणारी मस्ती बाकांवारची
आज सारच काही मिस करतोय मी
उगाच, उगाच मोठा झालो मी !!!
@ लकी

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ढापलेल्या कविता: उगाच
उगाच
ढापलेल्या कविता
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